PM Modi का दमदार भाषण सुन चौंक गया अंग्रेजी पत्रकारPM Modi का दमदार भाषण सुन चौंक गया अंग्रेजी पत्रकार

पूरे विश्व में इतना ज्यादा रेशियो? किसी और देश में नहीं है अब तो भारत में हो रही डिजिटल क्रांति की वजह से डेयरी सेक्टर में ज्यादातर लेनदेन बहुत तेज गति से होने लगी मैं समझता हूँ भारत की डेयरी कोऑपरेटिव्स की स्टडी उनके बारे में जानकारी डेयरी सेक्टर में डेवलप किया गया डिजिटल पेमेंट सिस्टम दुनिया के बहुत से देशों के किसानों के बहुत काम आ सकता इसलिये भारत के डेयरी सेक्टर की एक और बड़ी ताकत है एक और यूनीकनेस है हमारी इन्डिजनस स्पीसीज़ भारत के पास गायों की भैंसों की जो स्थानीय ब्रीड है वो कठिन से कठिन मौसम में भी सर्वाइव करने के लिए जानी जाती? मैं आपको गुजरात की बननी भैस का उदाहरण देना चाहूंगा ये बननी भै कच्छ के रेगिस्तान और वहाँ की परिस्थितियों से ऐसी घुल मिल गई है कि देखकर कई बार हैरानी होती दिन में बहुत ही भयंकर धूप होती है बहुत गर्मी होती है, कड़क धूप होती है इसलिए ये बननी भ्ंस रात के कम तापमान में घास चरने के लिए निकलती है विदेश से आए हमारे साथी ये जान करके भी चौंक जाएंगे कि उस समय बन्नी भैस के साथ कोई उसका पालक, उसका किसान उसके साथ नहीं होता है वो गांव के पास बने चार गांव में खुद ही जाती है
रेगिस्तान में पानी कम होता है इसलिए बहुत कम पानी में अभी बन्नी भैस का काम चल जाता है बन्नी भैन्स रात में दस दस पंद्रह पंद्रह किलोमीटर दूर जाकर घास चरने के बाद भी सुबह अपने आप खुद घर चली जाती ऐसा बहुत कम सुनने में आता है कि किसी की बननी भैस खो गई हो या गलत घर में चली गई हो? मैंने आपको सिर्फ बन्नी भैस का ही उदाहरण दिया है लेकिन भारत में मूरा, मेहसाणा, जाफराबादी, नीली रवि, पंडित पुरी जैसी अनेक नस्लें भेंस की आज भी अपने अपने तरीके से विकसित हो रही है इसी तरह गाय हो? उसमें गिर गाय सहीवाल, राठी, कांकरेज, थारपारकर, हरियाणा एसी ही कितनी गाय की नस्लें हैं? जो भारत के डेयरी सेक्टर को यूनिक बनाती भारतीय नस्ल के ज्यादातर पशु क्लाइमेट कंफर्टेबल भी होते हैं और उतने ही एडजस्ट भी साथियों? अभी तक मैंने आपको भारत के डेयरी सेक्टर की तीन यूनिकनेस बताई जो इसकी पहचान छोटे किसानों की शक्ति कोऑपरेटिव की शक्ति और भारतीय नस्लें पशुओं की शक्ति मिल कर एक अलग ही ताकत बनती है, लेकिन भारत के डेयरी सेक्टर की एक चौथी यूनिकनेस भी है, जिसकी उतनी चर्चा नहीं हो पाती जिसकों उतना रेकग्नाइज़्ड नहीं मिल रिकग्निशन नहीं मिल पाता विदेश से आए हमारे मेहमान संभवतः ये जानकर के हैरान हो जाएंगे कि भारत के डेयरी सेक्टर में वुमेन पावर वुमेन पावर सेवन्टी परसेंट वर्कफोर्स का प्रतिनिधित्व करती है भारत के डेयरी सेक्टर की असली कर्णधार वुमेन से महिलाएं इतना ही नहीं भारत के डेयरी कोऑपरेटिव में भी एक तिहाई से ज्यादा सदस्य महिलाएं हैं आप अंदाजा लगा सकते हैं भारत में जो डेयरी सेक्टर साडे, आठ लाख करोड़ रुपये का है जिसकी वैल्यू धान और गेहूं के कुल प्रोडक्शन से भी ज्यादा है उसकी ड्राइविंग फोर्स भारत के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाएं हैं हमारी माताएं है हमारी बेटियां मैं वर्ल्ड डेयरी समिट से जुड़ी सभी महानुभावों से भारत की नारी शक्ति की इस भूमिका को रिकॉग्नाइज करने इससे विभिन्न वर्ल्ड प्लैटफॉर्म पर ले जाने का भी मैं आग्रह करूँगा साथियों? दो हज़ार चौदह के बाद से हमारी सरकार ने भारत के डेयरी सेक्टर के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया आज इसका परिणाम मिल्क प्रोडक्शन से लेकर किसानों की बड़ी आय में भी नजर आ रहा दो हज़ार चौदह में भारत में हंड्रेड फॉर्टी सिक्स मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था अब ये बढ़कर टू हंड्रेड टेन मिलियन टन तक 
पहुँच गया है यानी करीब करीब फोर्टीफोर परसेंट की वृद्धि आज पूरे विश्व में मिल्क प्रोडक्शन टू परसेंट की रफ्तार से बढ़ रहा है जबकि भारत में इसकी रफ्तार छह प्रतिशत से भी ज्यादा है भारत में दूध की पर कैपिटा अवेलेबिलिटी पूरे विश्व के औसत से कहीं ज्यादा है बीते तीन चार वर्षों में ही भारत के छोटे किसानों बैंक खाते हमारी सरकार ने गरीब दो लाख करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए इसका बहुत बड़ा हिस्सा डेयरी सेक्टर से जुड़े किसानों के खातों में भी आया साथियों? आज हमारा फोकस देश में एक संतुलित डेरी इको सिस्टम के निर्माण पड़ा एक ऐसा इकोसिस्टम ऐम जिसमे हमारा ध्यान दूध और उससे जुड़े उत्पादों की क्वालिटी पर तो है ही बल्कि दूसरी चुनौतियों के समाधान पर भी किसान को अतिरिक्त आय गरीब का सशक्तिकरण स्वच्छता केमिकल फ्री खेती क्लीन एनर्जी और पशुओं की केर ये सभी आपस में जुड़े हुए यानी हम डेयरी सेक्टर को पशुपालन को भारत के गांवों में ग्रीन और सस्टेनेबल ग्रोथ का बहुत बड़ा माध्यम बना रहे राष्ट्रीय गोकुल मिशन गोबर धन योजना डेयरी सेक्टर का डिजिटाइजेशन और पशुओं का यूनिवर्सल वैक्सिनेशन इसी दिशा में हो रहे प्रयास इतना ही नहीं भारत ने जो 

सिंगल यूज़ प्लास्टिक बंद करने का जो अभियान चलाया वो एनवायरनमेंट की दृष्टि से तो महत्व का है ही लेकिन जो भी जीवदया में विश्वास करते हैं जो पशुधन में उसके कल्याण में विश्वास करते हैं, उनको मालूम है कि प्लास्टिक पशुओं के लिए कितना खतरनाक बनता जा रहा है? गाय और भैस के लिए कितना खतरनाक बनता जा रहा है उस सिंगल यूज़ प्लास्टिक को भी बंद करने का खत्म करने का? हमने बहुत लगातार प्रयास आरंभ किया है साथियों? भारत के डेयरी सेक्टर का जितना बड़ा स्केल है उसे साइंस के साथ जोड़कर और विस्तार दिया जा रहा भारत डेरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार कर रहा डेयरी सेक्टर से जुड़े हर पशु की टैगिंग हो रही आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से हम पशुओं की बायोमैट्रिक पहचान कर रहे हमने इसे नाम दिया है पशु आधार पशु आधार के जरिये पशुओं की डिजिटल आइडेंटिफिकेशन की जा रही है जिससे उनकी सेहत पर नजर रखने के साथ साथ डेयरी प्रोडक्ट्स से जुड़े मार्केट को विस्तार देने में मदद मिले गी साथियों? आज भारत का बहुत बड़ा फोकस पशुपालन के क्षेत्र में उद्यमशीलता को एंटरप्राइज़ को बढ़ावा देने पर भी डेयरी सेक्टर से जुड़े छोटे किसानों की ताकत को हम फार्मर प्रोडूसर 

सिंगल यूज़ प्लास्टिक बंद करने का जो अभियान चलाया वो एनवायरनमेंट की दृष्टि से तो महत्व का है ही लेकिन जो भी जीवदया में विश्वास करते हैं जो पशुधन में उसके कल्याण में विश्वास करते हैं, उनको मालूम है कि प्लास्टिक पशुओं के लिए कितना खतरनाक बनता जा रहा है? गाय और भैस के लिए कितना खतरनाक बनता जा रहा है उस सिंगल यूज़ प्लास्टिक को भी बंद करने का खत्म करने का? हमने बहुत लगातार प्रयास आरंभ किया है साथियों? भारत के डेयरी सेक्टर का जितना बड़ा स्केल है उसे साइंस के साथ जोड़कर और विस्तार दिया जा रहा भारत डेरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार कर रहा डेयरी सेक्टर से जुड़े हर पशु की टैगिंग हो रही आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से हम पशुओं की बायोमैट्रिक पहचान कर रहे हमने इसे नाम दिया है पशु आधार पशु आधार के जरिये पशुओं की डिजिटल आइडेंटिफिकेशन की जा रही है जिससे उनकी सेहत पर नजर रखने के साथ साथ डेयरी प्रोडक्ट्स से जुड़े मार्केट को विस्तार देने में मदद मिले गी साथियों? आज भारत का बहुत बड़ा फोकस पशुपालन के क्षेत्र में उद्यमशीलता को एंटरप्राइज़ को बढ़ावा देने पर भी डेयरी सेक्टर से जुड़े छोटे किसानों की ताकत को हम फार्मर प्रोडूसर 
 ऑर्गनाइजेशंस और महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से एकजुट कर रहे हैं इनको बड़ी मार्केट फोर्स बना रहे हैं अपने युवा टैलेंट का उपयोग हम एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर्स में स्टार्टअप के निर्माण में भी कर रहे हैं
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