शीतल पाल के बगैर अधूरी है आजादी

 पाल के बगैर अधूरी है आजादी

मुहम्मद इब्राहिमपुर

की दास्तां

गुलामी की जंजीरों से भला कौन बंधा रहना चाहता है। आजादी की खुली हवा में हर कोई सांस लेना चाहता है। यहां तक की पिंजरे में बंद परिंदे भी मुक्त गगन में आजादी से परवाज करना चाहते हैं। अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होने को कुछ ऐसी ही तड़प थो कि जब विद्रोह को चिंगारी उपजो तो हर कोई देश को आजाद कराने की जुनून में कुछ कर गुजरने को आतुर हो उठा। क्या जमीदार, क्या किसान व मजदूर सभी आजादी को राह में अपनी शहादत देने को तैयार हो उठे। 1857 की क्रांति में जब देश के लिए कुछ कर गुजरने की एक किरण दिखाई पड़ी तो पानी निवासी चरवाहा समाज से जुड़े शहीद शीतल पाल ने भी जरा भी देर नहीं लगाई। अंग्रेज मजिस्ट्रेट विलियन रिचर्ड मूर को अपनी लग्गी से

शहीदपाल की प्रतिमा

भाग रहे अंग्रेज अफसर मूर को लग्गी से फंसकर कर दिया था धराशाई

फंसाकर घोड़े से गिराने में जरा भी हिचक नहीं दिखाई।

गौरव गाथा

ऐ मेरे प्यारे वतन...

के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विलियन रिचर्ड मूर द्वारा क्रांति का नेतृत्व कर कर रहे परऊपुर निवासी बाबू जुरी सिंह के भाई उदवंत सिंह सहित तीन लोगों को धोखे से बुलाकर गोपोगंज के शाही सड़क पर स्थित नीम के पेड़ में फांसी पर लटका दिया था। उसी समय शहीद झूरो सिंह की भाभी रत्ना सिंह ने कसम दिया कि जब तक मूर का सिर नहीं लाएंगे वह अपना केश खुला रखेंगी। फिर क्या था पूरी सिंह तलवार लिए विलियन मूर का सिर कलम करने निकल पड़े। इसकी भनक लगते ही मूर अपने हवा से बात

करते घोड़े पर सवार साथियों संग पाली । गोदाम से भाग निकला तो पीछे लगे पूरी सिंह को देख पाली के पास ही अपनी भेड़-बकरियों को चरा रहे शीतल पाल ने बगैर समय गंवाए मूर को अपनी लग्गी से फंसाकर घोड़े से गिरा दिया व पिटाई शुरू कर दी। इतने में शहीद झूरी सिंह भी पहुंचकर अंग्रेज अधिकारी का सर कलम कर दिया। अंग्रेजों ने कुछ दिन याद हो शहीद शीतल पाल को नजरबंद कर फांसी पर लटका दिया था।

दरअसल, अंग्रेजों से आजादी दिलाने को लेकर चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन के तहत 1857 की क्रांति के दौरान भदोही से भी नील की खेशी कराने को लेकर विद्रोह की चिंगारी उपजी थी। उस दौरान अंग्रेजी शासन

2012 में मिली शहादत को पहचान : शहीद शीतल पाल की शहादत को वर्ष 2012 उस समय पहचान मिली जय विधायक ज्ञानपुर विजय कुमार मिश्र ने ज्ञानपुर नगर के पुरानी कलेक्ट्रो तिराहे पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। उनके खानदान से जुड़े रामसहारे पाल ने कहा कि हमें अपने पूर्वज की शहादत पर गर्व है।


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